आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence (AI) in Hindi) कृत्रिम बुद्धिमत्ता

पर Rohini द्वारा प्रकाशित

हेलो दोस्तों, में आपके लिए आज पेश कर रहा हूं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence (AI) in Hindi), मतलब कृत्रिम बुद्धिमत्ता| एक जमाने में इंसानों जैसा सोचने वाली, फैसले लेने वाली और खुद के हिसाब से काम करने वाली मशीनें फिल्मों में ही देखने को मिलती थी, लेकिन अब ये फ़िल्मी मशीने हमारे जीवन में हमारे आस पास दाखिल होने लगी हैं| 

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आपने बहुत बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence (AI)) के बारे में सुना होगा, लेकिन इसके बारे में जानकारी रखने वाले बहुत कम लोग हमें मिलेंगे| तो बिना देरी किए चलिए जल्द से जल्द शुरू करते हैं और समझते हैं कि आखिर यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence (AI)) यानी हिंदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या होता है, यह कैसे काम करता है और यह हमारे लिए दिन प्रतिदिन इतना जरूरी क्यों होते जा रहा है|

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी (Artificial Intelligence (AI) Technology) के बारे में सन 1956 में दी डार्टमाउथ कॉन्फ्रेंस (The Dartmouth Conference) में सबसे पहले जॉन मैक्कार्थी (John McCarthy) ने ही दुनिया को बताया था, वह एक अमेरिकन कंप्यूटर साइंटिस्ट (computer scientist) थे|

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है? (What is Artificial Intelligence In Hindi?)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence (AI)) का हिंदी में अर्थ है कृत्रिम तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता| आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यह एक ऐसा सिमुलेशन (simulation) है जिससे कि मशीनों को इंसानों जैसा इंटेलिजेंस दिया जाता है, ताकि यह इंसानों की तरह काफी हद तक सोच सकें और काम कर सकें|

इस प्रक्रिया में खासकर 3 प्रोसेसेस (processes) शामिल होते है, उसमें से पहला लर्निंग (learning) जिसमें मशीनों के दिमाग में याने मेमोरी (memory) में इंफॉर्मेशन (information) भर दी जाती है और कुछ रूल्स (rules) भी सेट किये जाते है जिससे  हो इंफॉर्मेशन (information) से और रूल्स (rules) के डायरेक्शन (direction) से दिए हुए कार्यों को पूरा कर सकें|

दूसरा रीजनिंग (reasoning) इसमें मशीनों को यह इंस्ट्रक्ट (Instruct) किया जाता है कि वह उन बनाए हुए रूल्स (rules) का पालन करके रिजल्ट (results) की तरफ अग्रसर हो जिससे कि उन्हें अप्प्रोक्सिमैट (approximate) या डिफाइन कंक्लुजन (definite conclusion ) मिल सके|

तीसरा और आखिरी है सेल्फ करेक्शन (self correction.) अगर हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence (AI)) की पर्टिकुलर एप्लीकेशन (particular application) के बारे में बात करें तो इसमें एक्सपर्ट सिस्टम (expert system), स्पीच रिकॉग्निशन (speech recognition) और मशीन विजन (vision) शामिल है| आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence (AI)) को इस प्रकार से बनाया गया है कि वह इंसानों की तरह ही सोच सके, काम कर सके, प्रॉब्लम (problem) को समझ सके, जैसे इंसानी दिमाग किसी भी प्रॉब्लम (problem) को समझते है उसे सीखते है, फिर उसे प्रोसेस (process) करते हैं, फिर डिसाइड (decide ) करते है कि क्या करना उचित होगा और फाइनली (finally ) उसे सॉल्व (solve ) करते हैं| उसी प्रकार की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence (AI)) में भी मशीनों को भी इंसानी दिमाग की सारी विशेषताएँ दी जाती है जिसके कारण वह बेहतर काम कर सके|

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मुख्य प्रकार (Main Types of Artificial Intelligence In Hindi):-

  1. Weak AI
  2. Strong AI

Weak AI :-

Weak AI को नैरो (narrow) AI भी कहा जाता है| इस प्रकार के AI को कुछ इस प्रकार डिजाइन (design) किया जाता है कि यह सिर्फ पर्टिकुलर टाक्स (particular task) ही कर सकें, जैसे कि वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट (virtual personal assistants) जैसे कि एप्पल्स सीरी (Apple’s siri)|

Strong AI :-

Strong AI को जनरल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (General Artificial Intelligence) भी कहा जाता है| इस प्रकार के AI सिस्टम (system) में generalized मनुष्य की बुद्धिमत्ता होती है जिससे इसे अगर कोई डिफिकल्ट टास्क (difficult task) भी दिया जाए तो भी आसानी से उसका सलूशन (solution) निकाल सकता है|

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अन्य प्रकार (Other Types of Artificial Intelligence in Hindi):-

1. रिएक्टिव मशीन (Reactive machines)

रिएक्टिव मशीन (Reactive machines) का एक उदाहरण है डीप ब्लू (deep blue) यह IBM Company का एक चेस (Chess) प्रोग्राम (Program) है और जिसने गर्री कास्पारोव (Garry Kasparov) को सन 1990 में हराया था| डीप ब्लू को कुछ इस प्रकार से डिजाइन (design) किया गया है कि यह चेसबोर्ड (chessboard) के पीसेस (Pieces) को आईडेंटिफाई (Identify) कर सकता है और उनके हिसाब से प्रेडिक्शन (prediction) कर सकता है| लेकिन इसमें एक त्रुटि है इसको खुद की मेमोरी नहीं है और इसके कारण यह पास्ट मूव (past move) को स्टोर नहीं कर सकता और इसकी वजह से यह पास्ट (past) मूव (move) को फ्यूचर (future) में इस्तेमाल नहीं कर सकता| 

2. लिमिटेड मेमोरी (Limited memory)

लिमिटेड मेमोरी (limited memory) जैसे AI सिस्टम (system) अपने मेमोरी (memory) में  स्टोर (store) किए हुए पास्ट एक्सपीरियंस (past experiences) को इस्तेमाल कर अपने फ्यूचर डिसीजन (future decisions) को तय करते हैं|

 3. ब्रेन थ्योरी (brain theory)

ब्रेन थ्योरी (brain theory) यह एक फिजियोलॉजी टर्म (psychology terms) है| यह हाइपोथेटिकल कंसेप्ट (hypothetical concept) है| इसमें यह दर्शाता है कि दूसरों का अपना बीलाइफ्स (beliefs), डिजायर (desires) और इंटेंशन (intention) होता है जोकि उनके डिसीजन (decisions) में इंपैक्ट (impact) डालते हैं|

 4. सेल्फ अवेयरनेस (self awareness)

सेल्फ अवेयरनेस (self awareness) जैसे कैटेगरी (category) के अंतर्गत AI systems की खुद की सेल्फ (self) अवेयरनेस (awareness) होती है, अपनी एक कॉन्शियसनेस (consciousness) होती है| मशीन जिसकी सेल्फ अवेयरनेस (self awareness) होती है वह अपने करंट (current) स्टेट (state) को समझते हैं और उसी इंफॉर्मेशन (information) को इस्तेमाल कर यह समझते हैं कि दूसरे क्या फील (feel) करते हैं|

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के उदाहरण:-

  1. एक्सपर्ट सिस्टम (expert system)
  2.  विजन सिस्टम (vision system)
  3.  स्पीच रिकॉग्निशन (speech recognition)
  4.  कंप्यूटर गेमिंग (computer gaming)
  5.  इंटेलिजेंट रोबोट्स (intelligent robots)
  6.  नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (natural language processing)
  7. ड्राइवरलेस कार (driver-less car) etc…

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1 टिप्पणी

Rohini Bauskar · 01/06/2020 पर 8:54 अपराह्न

This is very helpful article.

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